ईरान की 'मौकापरस्ती'? तेल संकट के बीच भारत को दिया ऑफर, लेकिन रखी हैं भारी शर्तें!
तेल संकट और भारत-ईरान संबंधों पर बड़ी खबर...
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका (Iran-America War) के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। इसी बीच ईरान ने भारत को तेल सप्लाई का ऑफर तो दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें 'मदद' से ज्यादा 'मौकापरस्ती' नजर आ रही है।
प्राइस और पेमेंट पर ईरान की मनमानी शर्तें
रॉयटर्स (Reuters) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के व्यापारियों ने भारतीय रिफाइनरियों को तेल देने का प्रस्ताव भेजा है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ईरान ने इसके लिए ICE Brent की तुलना में भारी प्रीमियम की मांग की है।
- महंगा तेल: ईरान कच्चे तेल की सामान्य कीमतों से कहीं ज्यादा भाव मांग रहा है।
- प्रीमियम चार्ज: सूत्रों के मुताबिक, यह प्रीमियम 6 से 8 डॉलर प्रति बैरल तक हो सकता है।
- पेमेंट का तरीका: ईरान चाहता है कि भुगतान डॉलर में हो, जबकि भारत अपनी मुद्रा (Rupee) में व्यापार को बढ़ावा देना चाहता है।
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क्यों बढ़ा तेल का संकट?
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थाई ढील मिलने के बाद, ईरान ने भारतीय रिफाइनरियों को लुभाने की कोशिश की है। हालांकि, भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से सीधे तौर पर कच्ची तेल की कोई बड़ी खेप नहीं खरीदी है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव रहा है। अब जब रूस के तेल पर भी कुछ पाबंदियां सख्त हुई हैं, तो भारत के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं।
भारत के पास क्या है विकल्प?
ईरान चाहता है कि भुगतान का निपटारा 7 दिनों के भीतर हो। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों के पास अब सिर्फ एक महीने का समय है यह तय करने के लिए कि वे इस 'महंगे' ऑफर को स्वीकार करते हैं या नहीं। भारत पहले ही भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद चुका है, लेकिन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उसे नए रास्तों पर विचार करना ही होगा।
निष्कर्ष
ईरान का यह ऑफर भारत के लिए 'दोधारी तलवार' जैसा है। एक तरफ तेल की सप्लाई का भरोसा है, तो दूसरी तरफ मनमानी कीमतें और पेमेंट की सख्त शर्तें। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय इस वैश्विक तेल संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।
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